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मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम

*मर्यादा पुरुषोत्तम
               श्रीराम*
राम आए अयोध्या निहाल हो गई,
सजी दुल्हन सी नगरी कमाल हो गई।
हर तरफ देखिए बस खुशी ही खुशी-
पा अपने ललन को खुशहाल हो गई।।

राम लौटे हैं दनुजों का करके दमन,
बेरहम जलते शोलों का करके शमन।
पा  बिछड़े ललन को यह नगरी सुनो-
दिव्यतम फल की बगिया रसाल हो गई।।

आज सरयू की लहरें उछलती दिखें,
पाँव सिंचन को प्रभु के थिरकती दिखें।
गीत-संगीत-गुंजित दिशाओं सहित-
अब तो मधुरिम अयोध्या की चाल हो गई।।

पीत-वसना यह नगरी अब स्वर्णिम लगे,
रौशनी में नहाई सी अरुणिम लगे।
वेद-मंत्रों की पाकर यह शुचिता सभी-
एक संगीत-सरिता-सुर-ताल हो गई।।

अब तो कायम हुए मूल्य मर्यादा के,
जो थे आदर्श पुरुषोत्तम श्री राम के।
राम का नाम सचमुच में है मंत्र शुचि-
अब यही सोच दुनिया की ढाल हो गई।।
     राम आए अयोध्या निहाल हो गई।।
                 ©डॉ0हरि नाथ मिश्र
                      9919446372

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3 Comments

Renu

20-Jan-2023 05:10 PM

👍👍🌺

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Babita patel

18-Jan-2023 05:41 PM

osm poem jai shri ram

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Swati chourasia

18-Jan-2023 04:46 PM

वाह बहुत ही खूबसूरत रचना 👌👌

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